शुक्रवार, दिसंबर 09, 2011

परीक्षाओं का मौसम और SMS.

        आजकल सर्दियों के मौसम के साथ-साथ एक और मौसम  चल रहा है "परीक्षाओं का मौसम".  ये सभी जानते हैं  की इस युग मे मौसम के अनुसार से SMS  भी तैरते रहते हैं.   हाँ , कभी -कभार बिन मौसम बरसात  के भी  SMS  बरसने  लगते हैं.  ये मौसमी  SMS  बड़े मजेदार होते हैं.. परीक्षाओं के दबाव मे जब ये  SMS  रूपी फल मोबाइल पर गिरते हैं तो बिल्कुल भी डिस्टर्ब नही करते बल्कि इन  रोचक SMS का स्वाद लेने से  दिमागी कंप्यूटर F5( refresh) हो जाता है....

परीक्षा  की तैयारीओं के समय एक SMS आया ..
hey frnds, 
 I am switching off my mobile due to exams bcoz i hv to work hard to get good marks. Plz contact me after..-15 min.
.
.Tabtak mera bhoot utar jayega.

परीक्षा शुरू होने से पहले एक Attitude भरा SMS मिला..

THOMAS ALWA EDITION QUOTE :-
Tomorrow is my exam..but i dont care Bcoz...A single sheet of paper can't decide my Future..!!


 कुछ  मस्ती  भरे SMS  भी मिले ..

1-chhod diye wo dhadhe,
   jinke anjam the gande.
  saare exams nek kaam me bitaunga..
  aur ab new year ke baad hi ladki pataunga..
  hat ja be..mandir ja raha hun.

2- do nalayak exams dene ke baad;-
1st- abe pepar kis sub. ka tha.
2nd-Math ka.
1st- means tu paper kar ke aaya hai
2nd- nahi be..wo maine samne wali ladki ke pass calculater dekha tha...:

3- Usko pane ke liye ham bhagwaan se bhi lad lete.
.
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par firr socha....
.
.
Exams ke time bhagwan se panga lena thik nahi....:-p

इस SMS की आख़िरी बाते कुछ छात्रो पर लागू होती हैं..:p

Har taraf padai ka saya hai.
Har paper me Zero aaya hai.
Ham to yun hi chale jate bina muh dhoye exams dene,,,
Aur Dost bolte hain ki..
" Kamina raat bhar pad ke aaya hai  "

मेरे दोस्त जिनकी परीक्षा अभी  शुरू हुई है  उनके लिए कोई विशेष SMS  नही, सिर्फ़  BEST OF LUCK....:)
मेरी परीक्षाएँ तो ख़त्म.!!

शनिवार, नवंबर 12, 2011

आइये जाने़ं कैमरे के शूटिंग मोड्स के बारे में ..

    आज इस टेक्नोयुग में रील वाले कैमरे के दिन लद गये, उनकी जगह अब digital कैमरे ने ले ली है.जहाँ पहले रील वाले कैमरे गावों में गिने चुने घरो में हुआ करते थे. वहीँ आज digital कैमरे हर घर में देखने को मिल जाते है चाहे मोबाइल में ही सही.सचमुच digital कैमरे ने फोटोग्राफी को कितना आसान बना दिया है. अब न एक आँख बंद करके फोटोग्राफी करने की झंझट और न ही फोटो देखने के लिए एक ३-४ दिन का इंतजार,और न ही फोटो ख़राब आने का गम. अब तो  दोनों आँखे  खोल के capturing,देखा,अगर फोटो  ख़राब आई तो चल डिलीट कर..:)
   आइये जानते हैं digital कैमरे के कुछ शूटिंग मोड्स के बारे में..
  


P या प्रोग्राम mode- 
                     प्रोग्राम मोड्स auto mode की तरह होता है. लेकिन इसमें user को ज्यादा control मिलता है . इसमें Aperture   और shutter speed की settings कैमरा खुद कर लेता है. लेकिन दूसरी controls जैसे ISO flash , white balance , focus point की settings user को खुद करनी  पड़ती है.  

TV  या S mode- 
          अधिकतर कैमरों में  शूटिंग  मोड्स  में TV ( time value) या S का सिम्बल  होता है . जिसका मतलब होता है- Shutter priority . इस mode में user किसी " तेज रफ़्तार " वाली  किसी  भी चीज की फोटो ले सकता है. Higher  shutter speed  पर किसी चीज की फ्रीज़ फोटो के सकते हैं . और किसी गतिमान चीज  का movement दिखाने के लिए  Slower  shutter speed  का प्रयोग कर सकते हैं.
 AV / A  mode- 
                 AV  (Aperture  value ) या A mode  का प्रयोग  किसी image के background  के focus के बारे में बताता है ..अगर user background को  difocus करना चाहता है तो Larger  Aperture  value  चुने.
 अगर background  के सभी objects  को focus करना चाहे तो smaller Aperture  value चुने .

मैक्रो mode-
          इसमें user छोटी से  छोटी चीजों का closeup ले सकता है ..अगर आपको तितली की तस्वीर लेनी है तो मेक्रो mode  में बेहतर तस्वीर ली जा सकती है .

manual  mode  - 
         इसमें user कैमरे के सभी controls खुद handle कर सकता है . इसमें अच्छा shot लेने के लिए user  shutter speed ,Aperture  value , ISO ,white balance खुद ही सेट कर सकता है.

Sports mode -
       इसमें user किसी तेज रफ़्तार object की तस्वीर ले सकता है . इसमें कैमरा ऑटोमेटिक  shutter speed , ISO (light  senstive) की मात्रा बड़ा देता है. जिससे subject  के movement के दौरान तस्वीर के blur  होने की संभावना कम हो जाती  है.
landscape mode -
         नेचुरल लैंडस्केप्स और इवेंट का शौक रखने वाले user इस option को चुन सकते है .इसमें कैमरा ऑटोमेटीकली  smaller Aperture  value  settings ले लेता है ताकि  Subjects  और background दोनों clear आए.

portrait mode-
            इस mode में user लोंगो का closeup ले सकते हैं .इसमें कैमरा स्वत subject को focus  रखता है और image  को soft  करके background को डीफोकस कर देता है .

सोमवार, अक्तूबर 10, 2011

आज फिर आप की कमी सी है....

  फेसबुक पर अचानक से खबर दिखी- "जगजीत सिंह  नहीं रहे ".....देखकर आँखों पर विश्वास नहीं हुआ....पुष्टिकरण  के लिए लिए बीबीसी हिंदी पर विजिट किया...वहां पर एक छोटी सी  ताज़ा खबर  " नहीं रहे जगजीत सिंह " प्रकाशित थी....इसके बाद फेसबुक पर दो ग्रुपों "रेडियोनामा- बातें रेडियो की " और "श्रोता बिरादरी" पर  मैंने ये खबर जैसे तैसे अपडेट कर दी... फिर जिसका डर था वही हुआ किसी ने मुझसे कह ही दिया-"अखिलेन्द्र , तुमने ये  अच्छी खबर नहीं  सुनाई..!!" मेरे पास इसका कोई जवाब  नहीं था.
     मैं जगजीत जी का बहुत बड़ा फैन नहीं हूँ ,पर उनकी गज़लें सुनना शुरू से ही अच्छा लगता है, जगजीत जी को सबसे पहले विविध भारती  के   प्रोग्राम  "कहकशा"  में सुनने का सौभाग्य मिला था.मैं तो बस गज़लें सुनता ,पर दीदी वकायदा उन्हें डायरी  में नोट भी करती थी. तब से जब भी ग़ज़लें सुनने का मन करता तो जगजीत जी याद आते. लैपटॉप में जगजीत सिंह जी  की ग़ज़लों का छोटा सा कलेक्शन है. जब भी शाम की तन्‍हाईयों में अकेला महसूस करता हूँ  ...तो इन गज़लों के साथ वक्त गुजरता है.

   आज की शाम बिल्‍कुल खामोश है. जगजीत जी की आवाज कमरे में  गूंज रही है...और कह रही हैं .. . शाम से आँख  में नमी सी है ..आज फिर आप की  कमी सी है .....



इस ग़ज़ल सम्राट को  मेरी विनम्र  श्रद्धांजलि.......।।

अखिलेन्द्र

रविवार, अक्तूबर 09, 2011

"आनंदी'' का आनंद

      ये वीकएंड वाकई काफी मजेदार गुजरा, वक्त था Kuldeep classes के पिकनिक का. मेरे दोस्त धर्मराज वर्मा इस कोचिंग इंस्टिट्यूट के  छात्र हैं . और मुझे भी इस पिकनिक पर अपने साथ ले गये  ..सुबह १० बजे से हमारी बस कुलदीप क्लास्सेस  से आनंदी वाटर पार्क  के लिए रवाना हुई...वीरों और वीरांगनाओं की बसें अलग अलग थी...इसलिए वीरों   के  बस का माहौल  मस्ती से भरपूर  था. मेरे ठीक सामने वाली सीट पर एक "आधुनिक छात्र " जो चुइंगम चबा रहे थे और बार बार उसे मुँह से बाहर निकाल कर  फुलाते-पिचकाते..उन्हें देख के लगा कि अभी भी चुइंगम फुलाने वाले जिंदा हैं...  ऐसा  इसलिए लगा कि बड़े दिनों बाद  किसी  को चुइंगम फुलाते देखा...
   तकरीबन ११ बजे  हमारी बस आनंदी वाटर पार्क पहुंची.  पहुँचते   ही सभी  बर्गर और कोल्ड ड्रिंक्स पर टूट पड़े जो की पहले से  कुलदीप क्लास्सेस  के  छात्रों के लिए तैयार था. नाश्ता करने  के बाद तुरंत  हम सभी वाटर पार्क में घुसे.
वीरों की टोली एक   तरफ थी  और वीरांगनाओं की  टोली दुसरी तरफ....
वीरों की टोली   


   
वीरांगनाएं   
कृत्रिम लहरों(artificial waves) के समय कहीं से एक मंडूक महाराज आ धमके मगर कृत्रिम लहरें उन्हें मार -मार  के किनारे कर देती और  शायद कहती - " हे मंडूक महाराज !  ये वक्त अभी आप का नहीं है क्योंकि अभी आपसे काफी बड़े बड़े मंडूक उछल-कूद मचा रहे  हैं  "

मंडूक महाराज 


 
बड़े मंडूक..:p 













कृत्रिम लहरों के बाद  सभी ने  झरने का आनंद लिया इसके तुरंत बाद  सभी डांस फ्लोर पर रिमिक्स गानों पर खूब थिरके...


कृत्रिम झरना 


डांस फ्लोर...











शांत माहौल में कृत्रिम लहरें और झरना 
३ बजे सबने लंच किया ...लंच के बाद भी कुछ लोग पानी में उछल -कूद करते रहे...कुछ लोग  पार्क में बैठ के आराम फरमाने लगे...! और मैं फोटोग्राफी में  ..!!

आनंदी रेस्टोरेंट ...(पीछे के खेत गाँव की याद दिला रहे हैं )


 
 स्लाईडर




शाम ५ बजे एक बड़े से  "थैंक्‍यू " के साथ सभी घर को लौटे 

इस पिकनिक से जुड़ी और तस्वीरों के लिए यहाँ क्लिक करें....

गुरुवार, अक्तूबर 06, 2011

ब्लॉग: एक सफरनामा

  खबरों  में अक्सर जब ये सुनने को मिलता की फलां  व्यक्ति ने अपने ब्लॉग पर ये लिखा है , तो मन में  एक सवाल उठता कि ये ब्लॉग क्या होता है. एक दिन कंप्यूटर टीचर  से पूछ बैठा सर ,- "ये ब्लॉग क्या होता है ?"
 जवाब मिला -"ब्लॉग इन्टरनेट की दुनिया में ,अखबारों के सम्पादकीय पृष्ठों तरह होता है , जिसमे कुछ विशेष लोग अपने विचार लिखते हैं , और कुछ लोग इसे अपनी निजी डायरी  की तरह इस्तेमाल करते हैं".
तभी दूसरा सवाल सर,-"ब्लॉग बनाते कैसे हैं ??"
जवाब-"यह गूगल द्वारा provide किया जाने वाला  free platform है. कोई भी व्यक्ति अपने जीमेल खाते के जरिये इस पर रजिस्टर हो सकता है  " ( बाद में पता चला गूगल के अतिरिक्त भी कई वेबसाइट्स इस काम में सक्रिय हैं जैसे wordperss, weebly etc. ).
आज़मगढ़ जैसे छोटे शहरों में इन्टरनेट  आज भी   महंगा है, उस समय  20-25 रूपए /घंटा चार्ज करते  थे . इसलिए बहुत ही कम साइबर  कैफे जाना होता था. तब मेरे पास  लपेटिया यंत्र भी नहीं  था .  इंस्टिट्यूट में सप्ताह में सिर्फ 1-2 दिन ही  कंप्यूटर इस्तेमाल के लिए मिलता  और इन्टरनेट महीने  में एक बार मिल जाये तो सौभाग्य की बात होती.  ऐडमिशन के समय तो 24 घंटे   इन्टरनेट  provide  करने  के  दावे किया जाते हैं .लेकिन  भारत के किसी  भी  इंस्टिट्यूट के फ्रेंचाईजी सेण्टर का हाल लगभग यही  होता है. 
 एक दिन साइबर  कैफे   में आर्कुटियाते समय ब्लॉग वाली बात याद आयी और किसी तरह गूगल ब्लॉग पर मैंने अपनी मौजूदगी दर्ज करा  ली.  और फिर इस बात को लगभग  भूल ही  चूका था  कि कुछ महीनें बाद "हिंदुस्तान " अख़बार में  सम्पादकीय पर रवीश जी के साप्ताहिकी कॉलम " ब्लॉग वार्ता " पर मेरी नजर पड़ी , जिसमें 2-4 ब्लॉगों की समीक्षा थी. घर लौटकर उन ब्लागों पर चटके लगाये .(तब तक मुझे लपेटिया यंत्र भी मिल  चुका था.उस समय मोबाइल को लैपटॉप  से कनेक्ट(ब्लूटूथ के जरिये) करके इन्टरनेट का आनंद लेते थे). उन ब्लॉग को पढ़ के लगा कि हमें भी ब्लॉग लिखना चाहिए कितने मजे का काम है ये . उसके बाद ब्लॉग का बुखार कई बार चढ़ा-उतरा . फिर याद  नहीं तबसे से लेकर आजतक  कितने ब्लॉग बनाये  गये और फिर डिलीट किये गये.  .
 अब इसी ब्लॉग  को लीजिये दो महीने से बना पड़ा है.....कल तक इस ब्लॉग का नाम कुछ और था और अब अंतिम समय में  दिमाग के घोड़े ने कहा-"अब बस !! बहुत हो  चुका..  मुझे इस काम के लिए दौड़ाना बंद करो" इस ब्लॉग का नाम  " छोटी सी टोकरी...मेरे मन की  " रख दो.....और इसी पर टिके रहो...:)
अखिलेन्द्र प्रताप यादव.

सोमवार, अक्तूबर 03, 2011

जन्मदिन मुबारक हो विविध भारती....

      आज विविध  भारती ने अपने 54 साल पुरे कर लिए और  साथ ही साथ मेरी रेडियो भी इसकी  आधी उम्र यानि 27वें साल के सफ़र में है. यह रेडियो 1984 में पापा को उनकी शादी में मिली थी. होश सभॉंलने से पहले पता नहीं घर कौन  कितना रेडियो सुनता था  और न ही  ये पता करने की कोशिश की, लेकिन जब होश सभॅांला तो घर में आकाशवाणी और बीबीसी हिंदी की आवाजों को  सुनते पाया । पापा और चाचा जी को संगीत सुनने का  कोई खास लगाव नहीं है वे लोग मुख्यत समाचारों और परिचर्चाओं को ही सुना करते थे . शाम के समय अक्सर चाचा जी "युववाणी " सुना करते थे। शुरू-शुरू में इस कार्यक्रम  के गाने आकर्षित करने लगे ...थोड़ा बड़े हुए तो क्रिकेट का शौक बड़ा तो रेडियो पर क्रिकेट कमेन्ट्री सुने जाने लगी...धीरे-धीरे  रेडियो प्रेम  बढने लगा. .तब आकाशवाणी वाराणसी और गोरखपुर खूब सुने जाते थे ।
   एक दिन  शोर्ट वेब पर   बीबीसी हिंदी ट्यून  करते  समय एक आवाज़ सुनाई दी " मंथन है आपके विचारों का दर्पण " जिसे युनुस खान अपने चिर- परिचित जोशीले अंदाज़  में पेश कर रहे थे ...थोड़ी देर में ही पता चल गया की यही "देश की सुरीली  धड़कन  विविध भारती है.".. (इससे पहले विविध भारती के बारे में इतना सुना था की कि यह एक ऐसा रेडियो चैनल है जिस पर हरदम गाने बजते हैं  लेकिन कभी ट्युन करने का प्रयास नहीं किया था.)  फिर उस दिन से  विविध भारती की आवाजें घर में गूँजने लगी। कुछ ही दिनों में  ममता  सिंह , रेनू बंसल , निम्मी मिश्रा , कमलेश  पटक,  लोकेन्द्र शर्मा ,कमल शर्मा, अशोक सोनावने , युनुस खान ,अमरकांत आदि  सभी लोंगो की आवाजों ने  मुझे विविध भारती का दीवाना बना दिया...   

      मैं और दीदी स्कूल से लौटकर पहले  सखी सहेली और पिटारा सुनते, और रात में समाचार सध्‍ंया के बाद  कहकशा , गुलदस्‍ता  छायागीत सुनते। सुबह में  त्रिवेणी , चित्रलोक , और आज के फनकार विशेष  रूप सुन जाते थे। इन सब कार्यक्रमों के मध्य युनुस खान के साथ  मंथन , जिज्ञासा , और यूथ एक्सप्रेस जैसे ज्ञानवर्धक  कार्यक्रम विविध भारती के लिए एक अलग पहचान कायम किये. जिसमे मनोरंजन के साथ साथ ज्ञान भी खूब बटोरे गये। लोकेन्द्र शर्मा  जी द्वारा  पिटारा में प्रस्तुत  किया जाने वाला कार्यक्रम " बाईस्कोप की बातें " की प्रंशसा के लिए कोई शब्द   ही नहीं है  मेरे पास। हवामहल कभी कभार ही सुन पाने  को  मिलता क्योंकि ये  पढाई के  साथ -साथ बीबीसी हिंदी का भी वक्त होता  था !

  गत वर्ष ही अमृतसर के डीएवी कालेज द्वारा आयोजित एक रेडियो वर्कशॉप  में संदीप सर की मदद से मेरी मुलाक़ात युनुस खान जी और ममता दीदी  से हुई, और इसी वर्ष फरवरी में जब मुंबई गया तो विविध भारती स्टूडियो भी गया,शनिवार का दिन होने के  कारण सिर्फ ममता  दीदी से ही मुलाकात हो पाई ..उनके साथ चित्रलोक  और sms के बहाने ,   vbs के तराने दो कार्यक्रमों  लाइव देखा. वाकई ये दोनों दिन मेरी जिन्दगी  के सबसे खुबसूरत हैं !!    
  "विविध भारती की इस 54वीं जयंती पर विविध भारती के सभी उद्घोषको को ढेर सारी शुभकामनाएं... "


*यह लेख पर रेडियोनामा पर भी प्रकाशित... 
अखिलेन्द्र प्रताप यादव 





शनिवार, अक्तूबर 01, 2011

कुछ बिखरी तस्‍वीरें...

 यह तस्वीर  अगस्त  २००७  में ली गयी थी ...दोहरीघाट,  मुक्ति धाम पार्क ..

लखनऊ के एक कंप्यूटर  शो रूम में...

अम्बेडकर पार्क लखनऊ में.....

गोवा में......

दीदी की शादी में की एक बढ़िया तस्वीर.....

रविवार, अगस्त 28, 2011

कविताओं में अन्‍ना(1)

आजकल पूरा देश "अन्नामय" है. हर गली, हर शहर  बस "मै अन्ना हूँ" के नाम की गाँधी टोपी और नारे, हाथ में तिरंगा और "भारत माता  की जय" के नारे.  भ्रष्टाचार  विरोधी  इस आन्दोलन बच्चे, बूढ़े , जवान सभी सम्मलित हैं. और मीडिया भी खूब साथ दे रही है. इस दौरान अखबारों से ,अन्ना पर लिखी   कवितायेँ जो  अच्छी लगी उन्हें यहाँ सहेज रहा हूँ...


गलियां बोली, मै भी अन्ना , कूचा बोला, मै भी अन्ना !
सचमुच देश समूचा बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना!

भ्रष्ट तंत्र का मारा बोला, महंगाई से हारा  बोला, !
बेबस और बेचारा बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

जोश बोला, मै भी अन्ना,  होश बोला, मै भी अन्ना !
युवा शक्ति का रोष बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना!!

साधू बोला मै भी अन्ना, योगी बोला मै भी अन्ना !
रोगी बोला, भोगी बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

गायक बोला, मै भी अन्ना, नायक बोला, मै भी अन्ना !
दंगो का खलनायक बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

कर्मनिष्ट  कर्मचारी बोला,  लेखपाल पटवारी बोला ! 
घुसखोर अधिकारी बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

मुंबई बोली,  मै भी अन्ना, दिल्ली बोली, मै भी अन्ना !
नौ सौ चूहे खाने  वाली, बिल्ली बोली, मै भी अन्ना !!

डमरू बजा मदारी बोला, नेता खद्दरधारी बोला !
जमाखोर व्यापारी बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

हइया बोला, मै भी अन्ना, हइशा  बोला, मै भी अन्ना !
ऐन जी ओ का पैसा बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

दायाँ बोला मै भी अन्ना,  बायां बोला मै भी अन्ना !
खाया पीया अघाया बोला, मै भी अन्ना ,मै भी अन्ना !!

निर्धन जन की तंगी बोली, जनता भूखी नंगी बोली !
हीरोइन अधनंगी  बोली, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

 नफरत बोली मै भी अन्ना,  प्यार बोला मै भी अन्ना !
हंसकर भ्रष्टचार बोला,  मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!
                                                                          ( अरुण आदित्य )

शनिवार, अगस्त 27, 2011

कविताओं में अन्‍ना(हास्‍य)

शर्मा जी , अगर आप अन्ना होते तो क्या करते?
मै बोला अगर मै अन्ना हजारे होता 
तो  इतनी भीड़ देखकर कहता 
मै तो अपनी ही चलाऊंगा 
प्रधानमंत्री जी आप उपवास करो 
देश अब  मै चलाऊंगा ।।
                                    (सुरेन्‍द्र शर्मा)

कविताओं में अन्‍ना

नेताओं  ने गाँधी की  कसम तक बेची,
कवियों  ने निराला की कलम तक बेची।
मत पूछ कि इस दौर में क्या-क्या न बिका, 
इंसानों ने आँखों की शरम तक बेची।
अन्ना जी ने देश में छेड़ा जो अभियान,
इससे होगा देश के जन जन का कल्याण ।।
                                                                                        (गोपाल दास नीरज)