रविवार, अगस्त 28, 2011

कविताओं में अन्‍ना(1)

आजकल पूरा देश "अन्नामय" है. हर गली, हर शहर  बस "मै अन्ना हूँ" के नाम की गाँधी टोपी और नारे, हाथ में तिरंगा और "भारत माता  की जय" के नारे.  भ्रष्टाचार  विरोधी  इस आन्दोलन बच्चे, बूढ़े , जवान सभी सम्मलित हैं. और मीडिया भी खूब साथ दे रही है. इस दौरान अखबारों से ,अन्ना पर लिखी   कवितायेँ जो  अच्छी लगी उन्हें यहाँ सहेज रहा हूँ...


गलियां बोली, मै भी अन्ना , कूचा बोला, मै भी अन्ना !
सचमुच देश समूचा बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना!

भ्रष्ट तंत्र का मारा बोला, महंगाई से हारा  बोला, !
बेबस और बेचारा बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

जोश बोला, मै भी अन्ना,  होश बोला, मै भी अन्ना !
युवा शक्ति का रोष बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना!!

साधू बोला मै भी अन्ना, योगी बोला मै भी अन्ना !
रोगी बोला, भोगी बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

गायक बोला, मै भी अन्ना, नायक बोला, मै भी अन्ना !
दंगो का खलनायक बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

कर्मनिष्ट  कर्मचारी बोला,  लेखपाल पटवारी बोला ! 
घुसखोर अधिकारी बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

मुंबई बोली,  मै भी अन्ना, दिल्ली बोली, मै भी अन्ना !
नौ सौ चूहे खाने  वाली, बिल्ली बोली, मै भी अन्ना !!

डमरू बजा मदारी बोला, नेता खद्दरधारी बोला !
जमाखोर व्यापारी बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

हइया बोला, मै भी अन्ना, हइशा  बोला, मै भी अन्ना !
ऐन जी ओ का पैसा बोला, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

दायाँ बोला मै भी अन्ना,  बायां बोला मै भी अन्ना !
खाया पीया अघाया बोला, मै भी अन्ना ,मै भी अन्ना !!

निर्धन जन की तंगी बोली, जनता भूखी नंगी बोली !
हीरोइन अधनंगी  बोली, मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!

 नफरत बोली मै भी अन्ना,  प्यार बोला मै भी अन्ना !
हंसकर भ्रष्टचार बोला,  मै भी अन्ना, मै भी अन्ना !!
                                                                          ( अरुण आदित्य )

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