शनिवार, अगस्त 27, 2011

कविताओं में अन्‍ना

नेताओं  ने गाँधी की  कसम तक बेची,
कवियों  ने निराला की कलम तक बेची।
मत पूछ कि इस दौर में क्या-क्या न बिका, 
इंसानों ने आँखों की शरम तक बेची।
अन्ना जी ने देश में छेड़ा जो अभियान,
इससे होगा देश के जन जन का कल्याण ।।
                                                                                        (गोपाल दास नीरज)

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