सोमवार, अक्तूबर 03, 2011

जन्मदिन मुबारक हो विविध भारती....

      आज विविध  भारती ने अपने 54 साल पुरे कर लिए और  साथ ही साथ मेरी रेडियो भी इसकी  आधी उम्र यानि 27वें साल के सफ़र में है. यह रेडियो 1984 में पापा को उनकी शादी में मिली थी. होश सभॉंलने से पहले पता नहीं घर कौन  कितना रेडियो सुनता था  और न ही  ये पता करने की कोशिश की, लेकिन जब होश सभॅांला तो घर में आकाशवाणी और बीबीसी हिंदी की आवाजों को  सुनते पाया । पापा और चाचा जी को संगीत सुनने का  कोई खास लगाव नहीं है वे लोग मुख्यत समाचारों और परिचर्चाओं को ही सुना करते थे . शाम के समय अक्सर चाचा जी "युववाणी " सुना करते थे। शुरू-शुरू में इस कार्यक्रम  के गाने आकर्षित करने लगे ...थोड़ा बड़े हुए तो क्रिकेट का शौक बड़ा तो रेडियो पर क्रिकेट कमेन्ट्री सुने जाने लगी...धीरे-धीरे  रेडियो प्रेम  बढने लगा. .तब आकाशवाणी वाराणसी और गोरखपुर खूब सुने जाते थे ।
   एक दिन  शोर्ट वेब पर   बीबीसी हिंदी ट्यून  करते  समय एक आवाज़ सुनाई दी " मंथन है आपके विचारों का दर्पण " जिसे युनुस खान अपने चिर- परिचित जोशीले अंदाज़  में पेश कर रहे थे ...थोड़ी देर में ही पता चल गया की यही "देश की सुरीली  धड़कन  विविध भारती है.".. (इससे पहले विविध भारती के बारे में इतना सुना था की कि यह एक ऐसा रेडियो चैनल है जिस पर हरदम गाने बजते हैं  लेकिन कभी ट्युन करने का प्रयास नहीं किया था.)  फिर उस दिन से  विविध भारती की आवाजें घर में गूँजने लगी। कुछ ही दिनों में  ममता  सिंह , रेनू बंसल , निम्मी मिश्रा , कमलेश  पटक,  लोकेन्द्र शर्मा ,कमल शर्मा, अशोक सोनावने , युनुस खान ,अमरकांत आदि  सभी लोंगो की आवाजों ने  मुझे विविध भारती का दीवाना बना दिया...   

      मैं और दीदी स्कूल से लौटकर पहले  सखी सहेली और पिटारा सुनते, और रात में समाचार सध्‍ंया के बाद  कहकशा , गुलदस्‍ता  छायागीत सुनते। सुबह में  त्रिवेणी , चित्रलोक , और आज के फनकार विशेष  रूप सुन जाते थे। इन सब कार्यक्रमों के मध्य युनुस खान के साथ  मंथन , जिज्ञासा , और यूथ एक्सप्रेस जैसे ज्ञानवर्धक  कार्यक्रम विविध भारती के लिए एक अलग पहचान कायम किये. जिसमे मनोरंजन के साथ साथ ज्ञान भी खूब बटोरे गये। लोकेन्द्र शर्मा  जी द्वारा  पिटारा में प्रस्तुत  किया जाने वाला कार्यक्रम " बाईस्कोप की बातें " की प्रंशसा के लिए कोई शब्द   ही नहीं है  मेरे पास। हवामहल कभी कभार ही सुन पाने  को  मिलता क्योंकि ये  पढाई के  साथ -साथ बीबीसी हिंदी का भी वक्त होता  था !

  गत वर्ष ही अमृतसर के डीएवी कालेज द्वारा आयोजित एक रेडियो वर्कशॉप  में संदीप सर की मदद से मेरी मुलाक़ात युनुस खान जी और ममता दीदी  से हुई, और इसी वर्ष फरवरी में जब मुंबई गया तो विविध भारती स्टूडियो भी गया,शनिवार का दिन होने के  कारण सिर्फ ममता  दीदी से ही मुलाकात हो पाई ..उनके साथ चित्रलोक  और sms के बहाने ,   vbs के तराने दो कार्यक्रमों  लाइव देखा. वाकई ये दोनों दिन मेरी जिन्दगी  के सबसे खुबसूरत हैं !!    
  "विविध भारती की इस 54वीं जयंती पर विविध भारती के सभी उद्घोषको को ढेर सारी शुभकामनाएं... "


*यह लेख पर रेडियोनामा पर भी प्रकाशित... 
अखिलेन्द्र प्रताप यादव 





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