गुरुवार, अक्तूबर 06, 2011

ब्लॉग: एक सफरनामा

  खबरों  में अक्सर जब ये सुनने को मिलता की फलां  व्यक्ति ने अपने ब्लॉग पर ये लिखा है , तो मन में  एक सवाल उठता कि ये ब्लॉग क्या होता है. एक दिन कंप्यूटर टीचर  से पूछ बैठा सर ,- "ये ब्लॉग क्या होता है ?"
 जवाब मिला -"ब्लॉग इन्टरनेट की दुनिया में ,अखबारों के सम्पादकीय पृष्ठों तरह होता है , जिसमे कुछ विशेष लोग अपने विचार लिखते हैं , और कुछ लोग इसे अपनी निजी डायरी  की तरह इस्तेमाल करते हैं".
तभी दूसरा सवाल सर,-"ब्लॉग बनाते कैसे हैं ??"
जवाब-"यह गूगल द्वारा provide किया जाने वाला  free platform है. कोई भी व्यक्ति अपने जीमेल खाते के जरिये इस पर रजिस्टर हो सकता है  " ( बाद में पता चला गूगल के अतिरिक्त भी कई वेबसाइट्स इस काम में सक्रिय हैं जैसे wordperss, weebly etc. ).
आज़मगढ़ जैसे छोटे शहरों में इन्टरनेट  आज भी   महंगा है, उस समय  20-25 रूपए /घंटा चार्ज करते  थे . इसलिए बहुत ही कम साइबर  कैफे जाना होता था. तब मेरे पास  लपेटिया यंत्र भी नहीं  था .  इंस्टिट्यूट में सप्ताह में सिर्फ 1-2 दिन ही  कंप्यूटर इस्तेमाल के लिए मिलता  और इन्टरनेट महीने  में एक बार मिल जाये तो सौभाग्य की बात होती.  ऐडमिशन के समय तो 24 घंटे   इन्टरनेट  provide  करने  के  दावे किया जाते हैं .लेकिन  भारत के किसी  भी  इंस्टिट्यूट के फ्रेंचाईजी सेण्टर का हाल लगभग यही  होता है. 
 एक दिन साइबर  कैफे   में आर्कुटियाते समय ब्लॉग वाली बात याद आयी और किसी तरह गूगल ब्लॉग पर मैंने अपनी मौजूदगी दर्ज करा  ली.  और फिर इस बात को लगभग  भूल ही  चूका था  कि कुछ महीनें बाद "हिंदुस्तान " अख़बार में  सम्पादकीय पर रवीश जी के साप्ताहिकी कॉलम " ब्लॉग वार्ता " पर मेरी नजर पड़ी , जिसमें 2-4 ब्लॉगों की समीक्षा थी. घर लौटकर उन ब्लागों पर चटके लगाये .(तब तक मुझे लपेटिया यंत्र भी मिल  चुका था.उस समय मोबाइल को लैपटॉप  से कनेक्ट(ब्लूटूथ के जरिये) करके इन्टरनेट का आनंद लेते थे). उन ब्लॉग को पढ़ के लगा कि हमें भी ब्लॉग लिखना चाहिए कितने मजे का काम है ये . उसके बाद ब्लॉग का बुखार कई बार चढ़ा-उतरा . फिर याद  नहीं तबसे से लेकर आजतक  कितने ब्लॉग बनाये  गये और फिर डिलीट किये गये.  .
 अब इसी ब्लॉग  को लीजिये दो महीने से बना पड़ा है.....कल तक इस ब्लॉग का नाम कुछ और था और अब अंतिम समय में  दिमाग के घोड़े ने कहा-"अब बस !! बहुत हो  चुका..  मुझे इस काम के लिए दौड़ाना बंद करो" इस ब्लॉग का नाम  " छोटी सी टोकरी...मेरे मन की  " रख दो.....और इसी पर टिके रहो...:)
अखिलेन्द्र प्रताप यादव.

5 टिप्‍पणियां:

  1. अब मन से लुकाछिपी बहुत हुई. दिल खोलकर सामने आइये.. आपका स्वागत है.

    विजयादशमी के इस पावन अवसर पर शुरूआत अच्छी रहेगी. ः)
    मेरी शुभकामनायें!!

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  2. bahut acche dost aap isi tarah se blog likhte raho hum hamesha aap ke sath hain


    BEST OF LUCK MY DEAR FRIEND

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  3. शुक्रिया दोस्‍तों...ये सफ़र अब जारी रहे्गा..।।

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  4. मैनें आज तक किसी भी ब्लाग को कभी सीरियसली फोलो नहीं किया, पर अब लगता है ये मेरा प्रथम ब्लाग होगा जिसे मैं फोलो करुंगा..
    आपकी सिम्पलिसिटी ही है जो हमें हमेशा प्रिय रही है.. ऐसे ही लिखते रहिए.. एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं..

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