रविवार, अक्तूबर 09, 2011

"आनंदी'' का आनंद

      ये वीकएंड वाकई काफी मजेदार गुजरा, वक्त था Kuldeep classes के पिकनिक का. मेरे दोस्त धर्मराज वर्मा इस कोचिंग इंस्टिट्यूट के  छात्र हैं . और मुझे भी इस पिकनिक पर अपने साथ ले गये  ..सुबह १० बजे से हमारी बस कुलदीप क्लास्सेस  से आनंदी वाटर पार्क  के लिए रवाना हुई...वीरों और वीरांगनाओं की बसें अलग अलग थी...इसलिए वीरों   के  बस का माहौल  मस्ती से भरपूर  था. मेरे ठीक सामने वाली सीट पर एक "आधुनिक छात्र " जो चुइंगम चबा रहे थे और बार बार उसे मुँह से बाहर निकाल कर  फुलाते-पिचकाते..उन्हें देख के लगा कि अभी भी चुइंगम फुलाने वाले जिंदा हैं...  ऐसा  इसलिए लगा कि बड़े दिनों बाद  किसी  को चुइंगम फुलाते देखा...
   तकरीबन ११ बजे  हमारी बस आनंदी वाटर पार्क पहुंची.  पहुँचते   ही सभी  बर्गर और कोल्ड ड्रिंक्स पर टूट पड़े जो की पहले से  कुलदीप क्लास्सेस  के  छात्रों के लिए तैयार था. नाश्ता करने  के बाद तुरंत  हम सभी वाटर पार्क में घुसे.
वीरों की टोली एक   तरफ थी  और वीरांगनाओं की  टोली दुसरी तरफ....
वीरों की टोली   


   
वीरांगनाएं   
कृत्रिम लहरों(artificial waves) के समय कहीं से एक मंडूक महाराज आ धमके मगर कृत्रिम लहरें उन्हें मार -मार  के किनारे कर देती और  शायद कहती - " हे मंडूक महाराज !  ये वक्त अभी आप का नहीं है क्योंकि अभी आपसे काफी बड़े बड़े मंडूक उछल-कूद मचा रहे  हैं  "

मंडूक महाराज 


 
बड़े मंडूक..:p 













कृत्रिम लहरों के बाद  सभी ने  झरने का आनंद लिया इसके तुरंत बाद  सभी डांस फ्लोर पर रिमिक्स गानों पर खूब थिरके...


कृत्रिम झरना 


डांस फ्लोर...











शांत माहौल में कृत्रिम लहरें और झरना 
३ बजे सबने लंच किया ...लंच के बाद भी कुछ लोग पानी में उछल -कूद करते रहे...कुछ लोग  पार्क में बैठ के आराम फरमाने लगे...! और मैं फोटोग्राफी में  ..!!

आनंदी रेस्टोरेंट ...(पीछे के खेत गाँव की याद दिला रहे हैं )


 
 स्लाईडर




शाम ५ बजे एक बड़े से  "थैंक्‍यू " के साथ सभी घर को लौटे 

इस पिकनिक से जुड़ी और तस्वीरों के लिए यहाँ क्लिक करें....

3 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद खूबसूरत!! (तस्वीरों की बात कर रहा हूँ.) और उतनी ही खूबसूरती से आपने कमेंट्री भी की है.. ;) खासकर बड़े मंडूकों पर.. ;) वीरों और वीरांगनाओं को देखकर ऐसा लगा मानों मस्ती में हम भी उसी जलाशय में छलांग लगा बैठे हो.. :)

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  2. main bhi ghuma chuka hu karib 1 saal phale ...
    badi achhi jagah hai yaar... kasm s maz aa jaata hai...

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