सोमवार, अक्तूबर 10, 2011

आज फिर आप की कमी सी है....

  फेसबुक पर अचानक से खबर दिखी- "जगजीत सिंह  नहीं रहे ".....देखकर आँखों पर विश्वास नहीं हुआ....पुष्टिकरण  के लिए लिए बीबीसी हिंदी पर विजिट किया...वहां पर एक छोटी सी  ताज़ा खबर  " नहीं रहे जगजीत सिंह " प्रकाशित थी....इसके बाद फेसबुक पर दो ग्रुपों "रेडियोनामा- बातें रेडियो की " और "श्रोता बिरादरी" पर  मैंने ये खबर जैसे तैसे अपडेट कर दी... फिर जिसका डर था वही हुआ किसी ने मुझसे कह ही दिया-"अखिलेन्द्र , तुमने ये  अच्छी खबर नहीं  सुनाई..!!" मेरे पास इसका कोई जवाब  नहीं था.
     मैं जगजीत जी का बहुत बड़ा फैन नहीं हूँ ,पर उनकी गज़लें सुनना शुरू से ही अच्छा लगता है, जगजीत जी को सबसे पहले विविध भारती  के   प्रोग्राम  "कहकशा"  में सुनने का सौभाग्य मिला था.मैं तो बस गज़लें सुनता ,पर दीदी वकायदा उन्हें डायरी  में नोट भी करती थी. तब से जब भी ग़ज़लें सुनने का मन करता तो जगजीत जी याद आते. लैपटॉप में जगजीत सिंह जी  की ग़ज़लों का छोटा सा कलेक्शन है. जब भी शाम की तन्‍हाईयों में अकेला महसूस करता हूँ  ...तो इन गज़लों के साथ वक्त गुजरता है.

   आज की शाम बिल्‍कुल खामोश है. जगजीत जी की आवाज कमरे में  गूंज रही है...और कह रही हैं .. . शाम से आँख  में नमी सी है ..आज फिर आप की  कमी सी है .....



इस ग़ज़ल सम्राट को  मेरी विनम्र  श्रद्धांजलि.......।।

अखिलेन्द्र

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