रविवार, फ़रवरी 26, 2012

निखिल आनंद गिरि से मुलाकात

      निखिल आनंद गिरि , एक जाने माने ब्लॉगर और युवा हिंदी  कवि, जिनका ब्लॉग बुरा-भला मैं  लगभग पौने 2 सालों  से पढ़ता  आ रहा हूँ. मुझे इनकी कवितायेँ पढ़ना बहुत ही अच्छा लगता है. मुझे इनसे मिलने की बड़ी तम्मना थी. मेरी ये तम्मना  पूरी हुई, उन्ही के शहर समस्तीपुर में, उनकी शादी के आमंत्रण पर-
       निखिल आनंद गिरि की  रचनायें जितनी ही खुबसूरत और प्रभावी होती हैं, उतने ही सरल और प्रभावी इंसान हैं वो. उनसे मिलकर मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब मानता हूँ. जिस अगली सुबह मुझे वहां से लौटना था उस रात हम उनकी कविताओं, कहानीओं पर ढेर सारी बाते करते रहे. बातों ही बातों में उन्होंने अपनी एक ग़ज़ल "इक भरम के वास्ते " सुनाई जो बड़ी ही खुबसूरत लगी. उसने बाते करके काफी मज़ा आ रहा था  तभी दीदी आ गयी और बोली "निखिल सोना नहीं है क्या ?? 11 बज रहे हैं..!!" इसके बाद निखिल जी "गुड नाईट" कह कर  सोने चले गये. "आखिर उनका भी कोई इंतजार  कर रहा था."
     और मैं उन अधूरी बातों को समेटते हुए  सोच रहा था कि आज 11 इतना जल्दी कैसे बज गया...!

2 टिप्‍पणियां:

  1. बस... अरे बाबा.. थोड़ा और लिखते ना.. बस इतना ही..??
    पोस्ट खत्म होने के बाद मैं भी सोच रहा था कि.. आज पोस्ट इतना जल्दी कैसे खत्म हो गया..
    :-)

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  2. ओह...ये पोस्ट तो अचानक दिख गया कहीं से....सही में थोड़ा जल्दी खत्म हो गया.....और क्या कहूं....

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